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अब ये हिसाब-किताब रहने दे,
ज़िंदगी! ज़ख़्मों पे नक़ाब रहने दे।
गिने नहीं जब तूने सितम अपने,
मेरे ज़ख़्म भी बे-जवाब रहने दे।
#shayari #audioshayariअब ये हिसाब-किताब रहने दे, ज़िंदगी! ज़ख़्मों पे नक़ाब रहने दे। गिने नहीं जब तूने सितम अपने, मेरे ज़ख़्म भी बे-जवाब रहने दे। #shayari #audioshayari0 Comments ·0 Shares ·109 Views ·3 Plays ·0 Reviews -
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सूखे दरिया पर कश्ती ले, ढूँढ रहे हो साहिल को ?
आंधी में जो दीप जलाए, वो ही समझे मुश्किल को
एक तरफ है ख़ाली पिंजरा, एक तरफ है अम्बर सारा
बेबस होकर देख रहा हूँ, मैं अपनी उस मंज़िल को
#shayari #audioshayari
सूखे दरिया पर कश्ती ले, ढूँढ रहे हो साहिल को ? आंधी में जो दीप जलाए, वो ही समझे मुश्किल को एक तरफ है ख़ाली पिंजरा, एक तरफ है अम्बर सारा बेबस होकर देख रहा हूँ, मैं अपनी उस मंज़िल को#shayari #audioshayari0 Comments ·0 Shares ·123 Views ·2 Plays ·0 Reviews -
शीशा पत्थर से टकरा कर, कहते हो लो टूट गया?
फिर क्यों इन बिखरे टुकड़ों में, ढूँढ रहे हो हासिल को?
अपने ही हाथों से तुमने, ख़ून किया जज़्बातों का
फिर भी इस रोते चेहरे से, ढूँढ रहे हो क़ातिल को?
पंख कतर कर ख़ुद हाथों से, कहते हो लो उड़ जाओ?
इस टूटी सी परवाज़ में क्या, ढूँढ रहे हो मंज़िल को?
#shayari #audioshayari
शीशा पत्थर से टकरा कर, कहते हो लो टूट गया? फिर क्यों इन बिखरे टुकड़ों में, ढूँढ रहे हो हासिल को? अपने ही हाथों से तुमने, ख़ून किया जज़्बातों का फिर भी इस रोते चेहरे से, ढूँढ रहे हो क़ातिल को? पंख कतर कर ख़ुद हाथों से, कहते हो लो उड़ जाओ? इस टूटी सी परवाज़ में क्या, ढूँढ रहे हो मंज़िल को?#shayari #audioshayari· 0 Comments ·0 Shares ·131 Views ·5 Plays ·1 Reviews1
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अपने हाथों ज़हर पिला कर, क्यों अनजान से बनते हो?
सब कुछ मेरा छीन के आख़िर, क्यों हैरान से बनते हो?
हर चेहरे पर सौ मुखौटे, दुनिया की ये फ़ितरत है
झूठ के इस बाज़ार में तुम, क्यों इंसान से बनते हो?
बहते रहना, मिटते जाना, क़तरे की मज़बूरी है
एक ज़रा सी बूँद हो आख़िर, क्यों तूफ़ान से बनते हो?
#shayari #audioshayari
अपने हाथों ज़हर पिला कर, क्यों अनजान से बनते हो?सब कुछ मेरा छीन के आख़िर, क्यों हैरान से बनते हो?हर चेहरे पर सौ मुखौटे, दुनिया की ये फ़ितरत हैझूठ के इस बाज़ार में तुम, क्यों इंसान से बनते हो?बहते रहना, मिटते जाना, क़तरे की मज़बूरी हैएक ज़रा सी बूँद हो आख़िर, क्यों तूफ़ान से बनते हो?#shayari #audioshayari· 0 Comments ·0 Shares ·130 Views ·3 Plays ·1 Reviews1
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तेरे नखरों का हक़दार भी मैं ही था,
और मेरी तरह कोई निभा न पाएगा,
मेरे जाने के बाद हर मुस्कान तेरी,
तन्हाई में मेरा ही नाम दोहराएगा… 💫
तेरे नखरों का हक़दार भी मैं ही था, और मेरी तरह कोई निभा न पाएगा, मेरे जाने के बाद हर मुस्कान तेरी, तन्हाई में मेरा ही नाम दोहराएगा… 💫#अल्फ़ाज़_ए_इश्क़ #उम्दाशायरी #दिल_की_बात #तन्हाई· 0 Comments ·0 Shares ·100 Views ·0 Reviews1
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