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दर्द ने बख़्शी है कुछ ऐसी सख़्ती मिज़ाज को
बस तेरे इश्क़ की एक याद रेशमी रह गई
कागज़ों पर जो उतारने लगे हम हाल-ए-दिल
लफ़्ज़ अश्कों में बहे और कलम थमी रह गई
#shayariदर्द ने बख़्शी है कुछ ऐसी सख़्ती मिज़ाज को बस तेरे इश्क़ की एक याद रेशमी रह गई कागज़ों पर जो उतारने लगे हम हाल-ए-दिल लफ़्ज़ अश्कों में बहे और कलम थमी रह गई #shayari0 Comments ·0 Shares ·314 Views ·0 Reviews -
लफ़्ज़ होठों पे रुके, आँख में नमी रह गई
पास वो होकर भी, जाने क्या कमी रह गई
हम चले थे मुकद्दर को सँवारने ऐ दोस्त
वक़्त की गर्द इन हाथों पे ही जमी रह गई
#shayariलफ़्ज़ होठों पे रुके, आँख में नमी रह गई पास वो होकर भी, जाने क्या कमी रह गई हम चले थे मुकद्दर को सँवारने ऐ दोस्त वक़्त की गर्द इन हाथों पे ही जमी रह गई #shayari0 Comments ·0 Shares ·314 Views ·0 Reviews -
दिलों की राह में ज़ख्मों का मेला क्यों है
भरी महफ़िल में हर इंसान अकेला क्यों है
गए जो छोड़ कर उनका गिला ही क्या करना
मगर ये दिल अभी तक उनसे उलझा क्यों है
#shayariदिलों की राह में ज़ख्मों का मेला क्यों है भरी महफ़िल में हर इंसान अकेला क्यों है गए जो छोड़ कर उनका गिला ही क्या करना मगर ये दिल अभी तक उनसे उलझा क्यों है #shayari0 Comments ·0 Shares ·322 Views ·0 Reviews -
जो मुट्ठी से फिसल जाए वो रेत है शायद
तो फिर इस रेत पर यादों का पहरा क्यों है
बदल जाते हैं चेहरे वक़्त की ज़द में आकर
मगर यादों का मंज़र अब भी ठहरा क्यों है
#shayariजो मुट्ठी से फिसल जाए वो रेत है शायद तो फिर इस रेत पर यादों का पहरा क्यों है बदल जाते हैं चेहरे वक़्त की ज़द में आकर मगर यादों का मंज़र अब भी ठहरा क्यों है #shayari0 Comments ·0 Shares ·316 Views ·0 Reviews -
टूट कर चाहा था जिसको, अजनबी वो हो गया
देखते ही देखते सब, आंसुओं में बह गया
रूह तक ज़ख्मी हुई है, इस कदर टूटा है दिल
दर्द होठों पर न आया, आँख से सब कह गया
#shayariटूट कर चाहा था जिसको, अजनबी वो हो गया देखते ही देखते सब, आंसुओं में बह गया रूह तक ज़ख्मी हुई है, इस कदर टूटा है दिल दर्द होठों पर न आया, आँख से सब कह गया #shayari0 Comments ·0 Shares ·330 Views ·0 Reviews -
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी बेरुखी जो रुलाए तो,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
वो जो रात-दिन की थी आशिक़ी,
वो जो बे-वजह की थी दिल्लगी,
मेरा हाथ छोड़ना राह में,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरा ज़िक्र महफ़िल में आए तो,
मेरा हाल कोई बताए तो,
मेरी याद को वहीं रोक कर,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
नए रास्तों पे निकल पड़े,
नए अजनबी से जो मिल पड़े,
कटे जो सफ़र किसी और संग,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।मेरी खामोशी जो चुभे कभी, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। मेरी बेरुखी जो रुलाए तो, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। वो जो रात-दिन की थी आशिक़ी, वो जो बे-वजह की थी दिल्लगी, मेरा हाथ छोड़ना राह में, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। मेरा ज़िक्र महफ़िल में आए तो, मेरा हाल कोई बताए तो, मेरी याद को वहीं रोक कर, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। नए रास्तों पे निकल पड़े, नए अजनबी से जो मिल पड़े, कटे जो सफ़र किसी और संग, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। मेरी खामोशी जो चुभे कभी, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।0 Comments ·0 Shares ·161 Views ·0 Reviews -