सूखे दरिया पर कश्ती ले, ढूँढ रहे हो साहिल को ?
आंधी में जो दीप जलाए, वो ही समझे मुश्किल को
एक तरफ है ख़ाली पिंजरा, एक तरफ है अम्बर सारा
बेबस होकर देख रहा हूँ, मैं अपनी उस मंज़िल को
#shayari #audioshayari
आंधी में जो दीप जलाए, वो ही समझे मुश्किल को
एक तरफ है ख़ाली पिंजरा, एक तरफ है अम्बर सारा
बेबस होकर देख रहा हूँ, मैं अपनी उस मंज़िल को
#shayari #audioshayari
सूखे दरिया पर कश्ती ले, ढूँढ रहे हो साहिल को ?
आंधी में जो दीप जलाए, वो ही समझे मुश्किल को
एक तरफ है ख़ाली पिंजरा, एक तरफ है अम्बर सारा
बेबस होकर देख रहा हूँ, मैं अपनी उस मंज़िल को
#shayari #audioshayari