• मेरे लफ़्ज़ों की दरारों से जो छन के आ रही है,

    ये वो रोशनी है, जिसे अंधेरों ने तराशा है।


    #shayari

    मेरे लफ़्ज़ों की दरारों से जो छन के आ रही है,ये वो रोशनी है, जिसे अंधेरों ने तराशा है।#shayari
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  • कंधों पे गर्दिशों का कोई सेहरा लिए हुए,

    हम चल रहे हैं आँखों में दरिया लिए हुए।​

    साँसों की उलझनों में भी परवाज़ की है ज़िद,

    पिंजरे में हैं, मगर आसमान का नक़्शा लिए हुए।​

    झुलसा रही है धूप मुसलसल हयात की,

    तन्हा खड़े हैं हम कोई साया लिए हुए।​

    हारे नहीं हैं वक़्त की इन साज़िशों से हम,

    ज़िंदा हैं अपनी राख में शोला लिए हुए।


    #shayari

    कंधों पे गर्दिशों का कोई सेहरा लिए हुए,हम चल रहे हैं आँखों में दरिया लिए हुए।​साँसों की उलझनों में भी परवाज़ की है ज़िद,पिंजरे में हैं, मगर आसमान का नक़्शा लिए हुए।​झुलसा रही है धूप मुसलसल हयात की,तन्हा खड़े हैं हम कोई साया लिए हुए।​हारे नहीं हैं वक़्त की इन साज़िशों से हम,ज़िंदा हैं अपनी राख में शोला लिए हुए।#shayari
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  • ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है,

    पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है।

    हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे,

    अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है।


    आज मन की ये थकन भी कह रही है,

    अश्क बन कर हर उदासी बह रही है।

    एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं,

    धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है।


    हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं,

    दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं।

    आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं,

    हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।


    #shayari #audioshayari

    ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है,पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है।हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे,अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है।आज मन की ये थकन भी कह रही है,अश्क बन कर हर उदासी बह रही है।एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं,धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है।हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं,दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं।आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं,हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।#shayari #audioshayari
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  • धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमको

    झूठ था जो रास्तों ने था बताया हमको


    तन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पर

    रौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको


    #shayari #audioshayari

    धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमकोझूठ था जो रास्तों ने था बताया हमकोतन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पररौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको#shayari #audioshayari
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  • दलीलें सब तुम्हारी हैं, अदालत भी तुम्हारी है,

    मुकद्दर की सियाही पर, हुकूमत भी तुम्हारी है!


    ग़मों को इस तरह ढँकना, लबों की मुस्कुराहट से,

    तबाही पर हँसने की, ये कैसी अदाकारी है!


    #shayari #audioshayari

    दलीलें सब तुम्हारी हैं, अदालत भी तुम्हारी है,मुकद्दर की सियाही पर, हुकूमत भी तुम्हारी है!ग़मों को इस तरह ढँकना, लबों की मुस्कुराहट से,तबाही पर हँसने की, ये कैसी अदाकारी है!#shayari #audioshayari
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  • मेरा आईना मुंसिफ़ है, अदालत मेरी बाक़ी है,

    गवाह खामोशियाँ हैं अब, मलामत मेरी बाक़ी है।

    सुना कर फैसला अपना, क़लम खुद तोड़ दी मैंने,

    क़फ़स का दर खुला है, पर हिरासत मेरी बाक़ी है।


    #shayari

    मेरा आईना मुंसिफ़ है, अदालत मेरी बाक़ी है,गवाह खामोशियाँ हैं अब, मलामत मेरी बाक़ी है।सुना कर फैसला अपना, क़लम खुद तोड़ दी मैंने,क़फ़स का दर खुला है, पर हिरासत मेरी बाक़ी है।#shayari
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  • तुम्हें तो इल्म था, इस धूप की फितरत शिकारी है,

    सजे हैं ज़ख्म जो दिल पर, तुम्हारी दस्तकारी है।


    #shayari

    तुम्हें तो इल्म था, इस धूप की फितरत शिकारी है,सजे हैं ज़ख्म जो दिल पर, तुम्हारी दस्तकारी है।#shayari
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  • शजर खुद ही जला कर, छाँव की उम्मीद जारी है,
    अजब ये खुद-फ़रेबी है, अजब ये पर्दा-दारी है!
    हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करना खुद चुना तुमने,
    फैसला भी तुम्हारा था, तकलीफ़ भी तुम्हारी है।
    #shayari
    शजर खुद ही जला कर, छाँव की उम्मीद जारी है, अजब ये खुद-फ़रेबी है, अजब ये पर्दा-दारी है! हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करना खुद चुना तुमने, फैसला भी तुम्हारा था, तकलीफ़ भी तुम्हारी है। #shayari
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  • मेरी तपती ज़िंदगी का,

    हासिल-ए-सुकून हो तुम

    रूह तक जो उतर गया है,

    वो हसीं जुनून हो तुम


    मेरी तपती ज़िंदगी का...


    #shayari #audioshayari

    मेरी तपती ज़िंदगी का, हासिल-ए-सुकून हो तुमरूह तक जो उतर गया है, वो हसीं जुनून हो तुममेरी तपती ज़िंदगी का...#shayari #audioshayari
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  • उम्र की इस कशमकश में,

    रुक गया है कारवाँ

    ऐ थकन, अब सो भी जा,

    मिल गया है आशियाँ


    उम्र की इस कशमकश में....


    #shayari #audioshayari

    उम्र की इस कशमकश में, रुक गया है कारवाँऐ थकन, अब सो भी जा, मिल गया है आशियाँउम्र की इस कशमकश में....#shayari #audioshayari
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  • अपने हाथों ज़हर पिला कर, क्यों अनजान से बनते हो?

    सब कुछ मेरा छीन के आख़िर, क्यों हैरान से बनते हो?


    हर चेहरे पर सौ मुखौटे, दुनिया की ये फ़ितरत है

    झूठ के इस बाज़ार में तुम, क्यों इंसान से बनते हो?


    बहते रहना, मिटते जाना, क़तरे की मज़बूरी है

    एक ज़रा सी बूँद हो आख़िर, क्यों तूफ़ान से बनते हो?


    #shayari #audioshayari

    अपने हाथों ज़हर पिला कर, क्यों अनजान से बनते हो?सब कुछ मेरा छीन के आख़िर, क्यों हैरान से बनते हो?हर चेहरे पर सौ मुखौटे, दुनिया की ये फ़ितरत हैझूठ के इस बाज़ार में तुम, क्यों इंसान से बनते हो?बहते रहना, मिटते जाना, क़तरे की मज़बूरी हैएक ज़रा सी बूँद हो आख़िर, क्यों तूफ़ान से बनते हो?#shayari #audioshayari
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  • शीशा पत्थर से टकरा कर, कहते हो लो टूट गया?

    फिर क्यों इन बिखरे टुकड़ों में, ढूँढ रहे हो हासिल को?


    अपने ही हाथों से तुमने, ख़ून किया जज़्बातों का

    फिर भी इस रोते चेहरे से, ढूँढ रहे हो क़ातिल को?


    पंख कतर कर ख़ुद हाथों से, कहते हो लो उड़ जाओ?

    इस टूटी सी परवाज़ में क्या, ढूँढ रहे हो मंज़िल को?


    #shayari #audioshayari

    शीशा पत्थर से टकरा कर, कहते हो लो टूट गया? फिर क्यों इन बिखरे टुकड़ों में, ढूँढ रहे हो हासिल को? अपने ही हाथों से तुमने, ख़ून किया जज़्बातों का फिर भी इस रोते चेहरे से, ढूँढ रहे हो क़ातिल को? पंख कतर कर ख़ुद हाथों से, कहते हो लो उड़ जाओ? इस टूटी सी परवाज़ में क्या, ढूँढ रहे हो मंज़िल को?#shayari #audioshayari
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