अब ये हिसाब-किताब रहने दे,
ज़िंदगी! ज़ख़्मों पे नक़ाब रहने दे।
गिने नहीं जब तूने सितम अपने,
मेरे ज़ख़्म भी बे-जवाब रहने दे।

#shayari #audioshayari
अब ये हिसाब-किताब रहने दे, ज़िंदगी! ज़ख़्मों पे नक़ाब रहने दे। गिने नहीं जब तूने सितम अपने, मेरे ज़ख़्म भी बे-जवाब रहने दे। #shayari #audioshayari
0 Comments ·0 Shares ·109 Views ·3 Plays ·0 Reviews