अब ये हिसाब-किताब रहने दे,
ज़िंदगी! ज़ख़्मों पे नक़ाब रहने दे।
गिने नहीं जब तूने सितम अपने,
मेरे ज़ख़्म भी बे-जवाब रहने दे।
#shayari #audioshayari
ज़िंदगी! ज़ख़्मों पे नक़ाब रहने दे।
गिने नहीं जब तूने सितम अपने,
मेरे ज़ख़्म भी बे-जवाब रहने दे।
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अब ये हिसाब-किताब रहने दे,
ज़िंदगी! ज़ख़्मों पे नक़ाब रहने दे।
गिने नहीं जब तूने सितम अपने,
मेरे ज़ख़्म भी बे-जवाब रहने दे।
#shayari #audioshayari