• अलविदा कहते हुए, होंठों का वो थरथराना!
    हँसते हँसते दर्द अपना, यूँ छुपाना याद है!!


    दर्द को सीने में रख कर, मुस्कुराना याद है!
    टूटते उस रिश्ते को हर पल, निभाना याद है!!


    सामने बैठे रहे पर, लब थे दोनों के सिले!
    पास रह कर भी दिलों का, दूर जाना याद है!!


    अलविदा कहते हुए वो, काँपते से हाथ और!
    अश्क आँखों में दबा कर, लौट आना याद है!!


    आज भी तन्हाइयों में, जब कभी रोते हैं हम!
    अपने टूटे दिल को खुद ही, फिर मनाना याद है!!


    साथ हँसना, साथ रोना, वो ज़माना याद है
    बीच रस्ते में अकेला, छोड़ जाना याद है


    पास आना, दूर जाना, दिल दुखाना याद है
    हमको अबतक आशिक़ी का, वो फ़साना याद है


    #ghazal #shayari #dilselyrics
    अलविदा कहते हुए, होंठों का वो थरथराना! हँसते हँसते दर्द अपना, यूँ छुपाना याद है!! दर्द को सीने में रख कर, मुस्कुराना याद है! टूटते उस रिश्ते को हर पल, निभाना याद है!! सामने बैठे रहे पर, लब थे दोनों के सिले! पास रह कर भी दिलों का, दूर जाना याद है!! अलविदा कहते हुए वो, काँपते से हाथ और! अश्क आँखों में दबा कर, लौट आना याद है!! आज भी तन्हाइयों में, जब कभी रोते हैं हम! अपने टूटे दिल को खुद ही, फिर मनाना याद है!! साथ हँसना, साथ रोना, वो ज़माना याद है बीच रस्ते में अकेला, छोड़ जाना याद है पास आना, दूर जाना, दिल दुखाना याद है हमको अबतक आशिक़ी का, वो फ़साना याद है #ghazal #shayari #dilselyrics
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  • लौट आने का कोई सवाल भी नहीं है,
    और पहले सा मेरा वो हाल भी नहीं है।

    ज़ख्म दिल पे जो इतना गहरा लगा है,
    अब तो मरहम पे ऐतबार ही नहीं है।

    जीना तेरे बिन अब मुहाल भी नहीं है,
    तेरी यादों में वो कमाल भी नहीं है।

    मैंने तन्हाई से जो रिश्ता बुना है,
    अब किसी साये की दरकार ही नहीं है।

    अब तो तेरा इंतज़ार ही नहीं है,
    अब तो तेरा इंतज़ार ही नहीं है।

    तेरे जाने का मलाल भी नहीं है,
    अब तो तेरा इंतज़ार ही नहीं है।

    #shayari #audioshayari
    लौट आने का कोई सवाल भी नहीं है, और पहले सा मेरा वो हाल भी नहीं है। ज़ख्म दिल पे जो इतना गहरा लगा है, अब तो मरहम पे ऐतबार ही नहीं है। जीना तेरे बिन अब मुहाल भी नहीं है, तेरी यादों में वो कमाल भी नहीं है। मैंने तन्हाई से जो रिश्ता बुना है, अब किसी साये की दरकार ही नहीं है। अब तो तेरा इंतज़ार ही नहीं है, अब तो तेरा इंतज़ार ही नहीं है। तेरे जाने का मलाल भी नहीं है, अब तो तेरा इंतज़ार ही नहीं है। #shayari #audioshayari
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  • तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो
    हज़र करो मिरे दिल से कि इस में आग दबी है

    दिला ये दर्द-ओ-अलम भी तो मुग़्तनिम है कि आख़िर
    न गिर्या-ए-सहरी है न आह-ए-नीम-शबी है

    नज़र ब-नक़्स-ए-गदायाँ कमाल-ए-बे-अदबी है
    कि ख़ार-ए-ख़ुश्क को भी दावा-ए-चमन-नसबी है

    हुआ विसाल से शौक़-ए-दिल-ए-हरीस ज़ियादा
    लब-ए-क़दह पे कफ़-ए-बादा जोश-ए-तिश्ना-लबी है

    ख़ुशा वो दिल कि सरापा तिलिस्म-ए-बे-ख़बरी हो
    जुनून ओ यास ओ अलम रिज़्क़-ए-मुद्दआ-तलबी है

    चमन में किस के ये बरहम हुइ है बज़्म-ए-तमाशा
    कि बर्ग बर्ग-ए-समन शीशा रेज़ा-ए-हलबी है

    इमाम-ए-ज़ाहिर-ओ-बातिन अमीर-ए-सूरत-ओ-मअनी
    'अली' वली असदुल्लाह जानशीन-ए-नबी है

    #shayari #audioshayari #mirzaghalib
    तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो हज़र करो मिरे दिल से कि इस में आग दबी है दिला ये दर्द-ओ-अलम भी तो मुग़्तनिम है कि आख़िर न गिर्या-ए-सहरी है न आह-ए-नीम-शबी है नज़र ब-नक़्स-ए-गदायाँ कमाल-ए-बे-अदबी है कि ख़ार-ए-ख़ुश्क को भी दावा-ए-चमन-नसबी है हुआ विसाल से शौक़-ए-दिल-ए-हरीस ज़ियादा लब-ए-क़दह पे कफ़-ए-बादा जोश-ए-तिश्ना-लबी है ख़ुशा वो दिल कि सरापा तिलिस्म-ए-बे-ख़बरी हो जुनून ओ यास ओ अलम रिज़्क़-ए-मुद्दआ-तलबी है चमन में किस के ये बरहम हुइ है बज़्म-ए-तमाशा कि बर्ग बर्ग-ए-समन शीशा रेज़ा-ए-हलबी है इमाम-ए-ज़ाहिर-ओ-बातिन अमीर-ए-सूरत-ओ-मअनी 'अली' वली असदुल्लाह जानशीन-ए-नबी है #shayari #audioshayari #mirzaghalib
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  • हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
    बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

    डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर
    वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले

    निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
    बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

    भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का
    अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले

    मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए
    हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले

    हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी
    फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले

    हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की
    वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले

    मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
    उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

    कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़
    पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

    #shayari #audioshayari #mirzaghalib
    हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़ पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले #shayari #audioshayari #mirzaghalib
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  • ज़िंदगी से मिले हैं जो ग़म उम्र भर
    आज उनको ग़ज़ल में सुनाने दे

    राज़-ए-दिल कब तलक हम छुपा कर रखें
    आज हर बात खुल कर बताने दे

    ख़्वाब जितने भी आँखों में सोए रहे
    आज पलकों पे उनको सजाने दे

    छोड़ आए हैं पीछे वो गलियाँ सभी
    एक नई दुनिया मुझको बसाने दे

    #shayari #audioshayari
    ज़िंदगी से मिले हैं जो ग़म उम्र भर आज उनको ग़ज़ल में सुनाने दे राज़-ए-दिल कब तलक हम छुपा कर रखें आज हर बात खुल कर बताने दे ख़्वाब जितने भी आँखों में सोए रहे आज पलकों पे उनको सजाने दे छोड़ आए हैं पीछे वो गलियाँ सभी एक नई दुनिया मुझको बसाने दे #shayari #audioshayari
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  • अपने साए को इतना समझाने दे
    मुझ तक मेरे हिस्से की धूप आने दे

    एक नज़र में कई ज़माने देखे तो
    बूढ़ी आँखों की तस्वीर बनाने दे

    बाबा दुनिया जीत के मैं दिखला दूँगा
    अपनी नज़र से दूर तो मुझ को जाने दे

    मैं भी तो इस बाग़ का एक परिंदा हूँ
    मेरी ही आवाज़ में मुझ को गाने दे

    फिर तो ये ऊँचा ही होता जाएगा
    बचपन के हाथों में चाँद आ जाने दे

    फ़स्लें पक जाएँ तो खेत से बिछ्ड़ेंगी
    रोती आँख को प्यार कहाँ समझाने दे

    #shayari #audioshayari
    अपने साए को इतना समझाने दे मुझ तक मेरे हिस्से की धूप आने दे एक नज़र में कई ज़माने देखे तो बूढ़ी आँखों की तस्वीर बनाने दे बाबा दुनिया जीत के मैं दिखला दूँगा अपनी नज़र से दूर तो मुझ को जाने दे मैं भी तो इस बाग़ का एक परिंदा हूँ मेरी ही आवाज़ में मुझ को गाने दे फिर तो ये ऊँचा ही होता जाएगा बचपन के हाथों में चाँद आ जाने दे फ़स्लें पक जाएँ तो खेत से बिछ्ड़ेंगी रोती आँख को प्यार कहाँ समझाने दे #shayari #audioshayari
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  • रोज़ सवेरे दिन का निकलना शाम में ढलना जारी है
    राख हुआ हूँ अंदर से, फिर भी जलना जारी है।

    तपती रेत पे दौड़ रहा हूँ दरिया की उम्मीद लिए
    वाक़िफ़ हूँ इस सहरा से फिर भी, ख़ुद को छलना जारी है।

    जाने कितनी बार ये टूटा जाने कितनी बार लुटा
    फिर भी सीने में इस पागल दिल का मचलना जारी है

    बरसों से जिस बात का होना बिल्कुल तय सा लगता था
    एक न एक बहाने से उस बात का टलना जारी है

    तरस रहे हैं एक सहर को जाने कितनी सदियों से
    वैसे तो हर रोज़ यहाँ सूरज का निकलना जारी है

    #shayari #audioshayari
    रोज़ सवेरे दिन का निकलना शाम में ढलना जारी है राख हुआ हूँ अंदर से, फिर भी जलना जारी है। तपती रेत पे दौड़ रहा हूँ दरिया की उम्मीद लिए वाक़िफ़ हूँ इस सहरा से फिर भी, ख़ुद को छलना जारी है। जाने कितनी बार ये टूटा जाने कितनी बार लुटा फिर भी सीने में इस पागल दिल का मचलना जारी है बरसों से जिस बात का होना बिल्कुल तय सा लगता था एक न एक बहाने से उस बात का टलना जारी है तरस रहे हैं एक सहर को जाने कितनी सदियों से वैसे तो हर रोज़ यहाँ सूरज का निकलना जारी है #shayari #audioshayari
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  • धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमको
    झूठ था जो रास्तों ने था बताया हमको

    तन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पर
    रौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको

    #shayari #audioshayari
    धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमको झूठ था जो रास्तों ने था बताया हमको तन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पर रौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको #shayari #audioshayari
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  • ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए
    दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया

    ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए
    दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया

    छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे
    छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे

    आपके दर को ही अपना घर कर लिया

    #shayari #audioshayari
    ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे आपके दर को ही अपना घर कर लिया #shayari #audioshayari
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  • कंधों पे गर्दिशों का कोई सेहरा लिए हुए,
    हम चल रहे हैं आँखों में दरिया लिए हुए।​
    साँसों की उलझनों में भी परवाज़ की है ज़िद,
    पिंजरे में हैं, मगर आसमान का नक़्शा लिए हुए।​
    झुलसा रही है धूप मुसलसल हयात की,
    तन्हा खड़े हैं हम कोई साया लिए हुए।​
    हारे नहीं हैं वक़्त की इन साज़िशों से हम,
    ज़िंदा हैं अपनी राख में शोला लिए हुए।


    #shayari
    कंधों पे गर्दिशों का कोई सेहरा लिए हुए, हम चल रहे हैं आँखों में दरिया लिए हुए।​ साँसों की उलझनों में भी परवाज़ की है ज़िद, पिंजरे में हैं, मगर आसमान का नक़्शा लिए हुए।​ झुलसा रही है धूप मुसलसल हयात की, तन्हा खड़े हैं हम कोई साया लिए हुए।​ हारे नहीं हैं वक़्त की इन साज़िशों से हम, ज़िंदा हैं अपनी राख में शोला लिए हुए। #shayari
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  • तेरे नखरों का हक़दार भी मैं ही था,
    और मेरी तरह कोई निभा न पाएगा,
    मेरे जाने के बाद हर मुस्कान तेरी,
    तन्हाई में मेरा ही नाम दोहराएगा… 💫
    #अल्फ़ाज़_ए_इश्क़ #उम्दाशायरी #दिल_की_बात #तन्हाई
    तेरे नखरों का हक़दार भी मैं ही था, और मेरी तरह कोई निभा न पाएगा, मेरे जाने के बाद हर मुस्कान तेरी, तन्हाई में मेरा ही नाम दोहराएगा… 💫 #अल्फ़ाज़_ए_इश्क़ #उम्दाशायरी #दिल_की_बात #तन्हाई
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