Directory
Discover new people, create new connections and make new friends
-
Please log in to like, share and comment!
-
अँधेरों से शिकायत का कोई हासिल नहीं होता,
हवा के रुख़ पे इक दीपक जलाना भी ज़रूरी है।
गले मिल कर गिले-शिकवे भुला देना रिवायत है,
मुहब्बत में ज़रा सा हक़ जताना भी ज़रूरी है।
फ़क़त वादे मुकम्मल ज़िंदगी को कर नहीं सकते,
जो थामा है किसी का हाथ, निभाना भी ज़रूरी है।
बहुत औरों के क़िस्सों को सुना है दिल लगा कर के,
कभी अपना कोई क़िस्सा सुनाना भी ज़रूरी है।
#shayari #audioshayariअँधेरों से शिकायत का कोई हासिल नहीं होता, हवा के रुख़ पे इक दीपक जलाना भी ज़रूरी है। गले मिल कर गिले-शिकवे भुला देना रिवायत है, मुहब्बत में ज़रा सा हक़ जताना भी ज़रूरी है। फ़क़त वादे मुकम्मल ज़िंदगी को कर नहीं सकते, जो थामा है किसी का हाथ, निभाना भी ज़रूरी है। बहुत औरों के क़िस्सों को सुना है दिल लगा कर के, कभी अपना कोई क़िस्सा सुनाना भी ज़रूरी है। #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 47 Views 2 0 Reviews -
उसूलों पे जहाँ आँच आये, टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर, ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है
बहुत बेबाक आँखों में ताल्लुक टिक नहीं पाता
मुहब्बत में कशिश रखने को, शर्माना ज़रूरी है
सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का
जो कहता है ख़ुदा है, तो नज़र आना ज़रूरी है
मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
कि इसके बाद भी दुनिया में, कुछ पाना ज़रूरी है
#shayari #audioshayariउसूलों पे जहाँ आँच आये, टकराना ज़रूरी है जो ज़िन्दा हों तो फिर, ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में ताल्लुक टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को, शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है, तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इसके बाद भी दुनिया में, कुछ पाना ज़रूरी है #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 51 Views 1 0 Reviews -
तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
यूँ ही नज़रों से नज़रें मिलाते रहो,
दर्द सीने का चुप-चाप ढल जाएगा।
तेरी साँसों की गरमी जो आती रहे,
बर्फ़ सा सर्द दिल भी पिघल जाएगा।
हाथ हाथों में लेकर जो बैठे रहो,
गिरता-पड़ता मुक़द्दर सँभल जाएगा।
अपनी ज़ुल्फ़ों का साया किए रखना तुम,
धूप का ये सफ़र भी बदल जाएगा।
तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
#shayari #audioshayariतुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो, वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा। यूँ ही नज़रों से नज़रें मिलाते रहो, दर्द सीने का चुप-चाप ढल जाएगा। तेरी साँसों की गरमी जो आती रहे, बर्फ़ सा सर्द दिल भी पिघल जाएगा। हाथ हाथों में लेकर जो बैठे रहो, गिरता-पड़ता मुक़द्दर सँभल जाएगा। अपनी ज़ुल्फ़ों का साया किए रखना तुम, धूप का ये सफ़र भी बदल जाएगा। तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो, वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा। #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 98 Views 3 0 Reviews -
ख़ुदारा इक निगाह-ए-नाज़ ही से देख लो हम को,
गरेबाँ, फाड़ने को आज, हम तय्यार बैठे हैं
कहाँ अब होश बाकी है, हमें इस आब-ओ-दाने का,
तुम्हारी इक झलक के हम, तलबगार बैठे हैं।
फ़क़त इक बार कह दो तुम, कि 'हम भी हैं, तुम्हारे ही',
न जाने कब से इस उम्मीद पे, बेक़रार बैठे हैं।
चले आओ कि, अब तो साँस भी रुक-रुक के आती है,
लबों पे जान लेकर हम तेरे बीमार बैठे हैं।
गरेबाँ, फाड़ने को आज, हम तय्यार बैठे हैं
#shayari #audioshayariख़ुदारा इक निगाह-ए-नाज़ ही से देख लो हम को, गरेबाँ, फाड़ने को आज, हम तय्यार बैठे हैं कहाँ अब होश बाकी है, हमें इस आब-ओ-दाने का, तुम्हारी इक झलक के हम, तलबगार बैठे हैं। फ़क़त इक बार कह दो तुम, कि 'हम भी हैं, तुम्हारे ही', न जाने कब से इस उम्मीद पे, बेक़रार बैठे हैं। चले आओ कि, अब तो साँस भी रुक-रुक के आती है, लबों पे जान लेकर हम तेरे बीमार बैठे हैं। गरेबाँ, फाड़ने को आज, हम तय्यार बैठे हैं #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 76 Views 1 0 Reviews -
दिल की हसरत की इंतहा क्या है?
इस ख़ता की भला सज़ा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है?
पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने,
उन से शिकवा भी अब बजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
#shayari #audioshayariदिल की हसरत की इंतहा क्या है? इस ख़ता की भला सज़ा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है? पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने, उन से शिकवा भी अब बजा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 72 Views 1 0 Reviews -
हँसी अपनी दिखाकर हम,
सभी आँसू छुपा बैठे
अँधेरों का तमाशा था,
नये जुगनू छुपा बैठे
वो आये थे सजा कर के,
दिलासों के नये मंज़र
निगाहों के असर में हम,
कोई जादू छुपा बैठे
शिकायत तो बहुत सी थीं,
मगर होंठों को सी कर हम
तड़पते दिल का इक नाज़ुक,
नया पहलू छुपा बैठे
हवाओं से गिला कैसा,
चमन उजड़ा तो क्या रोना
कि हम खुद ही गुलाबों की,
सभी खुशबू छुपा बैठे
#shayari #audioshayariहँसी अपनी दिखाकर हम, सभी आँसू छुपा बैठे अँधेरों का तमाशा था, नये जुगनू छुपा बैठे वो आये थे सजा कर के, दिलासों के नये मंज़र निगाहों के असर में हम, कोई जादू छुपा बैठे शिकायत तो बहुत सी थीं, मगर होंठों को सी कर हम तड़पते दिल का इक नाज़ुक, नया पहलू छुपा बैठे हवाओं से गिला कैसा, चमन उजड़ा तो क्या रोना कि हम खुद ही गुलाबों की, सभी खुशबू छुपा बैठे #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 57 Views 1 0 Reviews -
निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।
सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन,
हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया।
कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में,
कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में,
डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया।
ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।
गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।
निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।
#shayari #audioshayariनिगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन, हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया। कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में, कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में, डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया। ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 60 Views 1 0 Reviews -
चेहरे पे मुकम्मल रज़ा की रौनक सजाए बैठे हैं,
उसे महफूज़ रखने को, खुद पे तोहमत लगाए बैठे हैं।
जो बिखर कर टूट गए हैं हम, तो ताज्जुब कैसा,
कोई बाज़ी नहीं, हम अपनी ज़िंदगी गँवाए बैठे हैं।
#shayari #audioshayariचेहरे पे मुकम्मल रज़ा की रौनक सजाए बैठे हैं, उसे महफूज़ रखने को, खुद पे तोहमत लगाए बैठे हैं। जो बिखर कर टूट गए हैं हम, तो ताज्जुब कैसा, कोई बाज़ी नहीं, हम अपनी ज़िंदगी गँवाए बैठे हैं। #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 80 Views 1 0 Reviews -
वजह जान लोगे, सवाल आएँगे,
जवाबों के नए बवाल आएँगे।
अधूरा ही रहने दो इस दास्ताँ को,
मुकम्मल किया तो मलाल आएँगे।
#shayari #audioshayariवजह जान लोगे, सवाल आएँगे, जवाबों के नए बवाल आएँगे। अधूरा ही रहने दो इस दास्ताँ को, मुकम्मल किया तो मलाल आएँगे। #shayari #audioshayari0 Comments 0 Shares 109 Views 1 0 Reviews