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  • Anupam Singh @anupam added audio
    2026-04-22 16:21:22 ·
    रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है,

    इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है।


    मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़,

    और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है।

    #shayari #audioshayari


    रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है,इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है।मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़,और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है।#shayari #audioshayari
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  • Anupam Singh @anupam added blog in Shayari
    2026-04-22 16:44:25 ·
    Raaton Ki Tadap Ka Koi Hisaab Nahi: Poetry Meaning & Analysis
    What happens when your love is met with silence? Read our heartfelt explanation of this sad Urdu poetry about waiting, lost dreams, and one-sided devotion. रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है: इश्क़, इंतज़ार और खामोशी की एक दर्द भरी दास्तान रात का सन्नाटा अक्सर उन लोगों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है, जिनके सीने में कोई अनकहा दर्द छुपा होता है। दिन की भागदौड़ में तो इंसान खुद को किसी तरह...
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  • Anupam Singh @anupam added audio
    2026-04-23 16:19:23 ·
    वजह जान लोगे, सवाल आएँगे,

    जवाबों के नए बवाल आएँगे।

    अधूरा ही रहने दो इस दास्ताँ को,

    मुकम्मल किया तो मलाल आएँगे।


    #shayari #audioshayari

    वजह जान लोगे, सवाल आएँगे, जवाबों के नए बवाल आएँगे। अधूरा ही रहने दो इस दास्ताँ को, मुकम्मल किया तो मलाल आएँगे।#shayari #audioshayari
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  • Anupam Singh @anupam added audio
    2026-04-23 16:44:06 ·
    चेहरे पे मुकम्मल रज़ा की रौनक सजाए बैठे हैं,

    उसे महफूज़ रखने को, खुद पे तोहमत लगाए बैठे हैं।

    जो बिखर कर टूट गए हैं हम, तो ताज्जुब कैसा,

    कोई बाज़ी नहीं, हम अपनी ज़िंदगी गँवाए बैठे हैं।


    #shayari #audioshayari

    चेहरे पे मुकम्मल रज़ा की रौनक सजाए बैठे हैं,उसे महफूज़ रखने को, खुद पे तोहमत लगाए बैठे हैं।जो बिखर कर टूट गए हैं हम, तो ताज्जुब कैसा,कोई बाज़ी नहीं, हम अपनी ज़िंदगी गँवाए बैठे हैं।#shayari #audioshayari
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  • Anupam Singh @anupam added audio
    2026-04-24 04:44:14 ·
    निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
    हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।

    सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन,
    हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया।

    कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में,
    कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में,
    डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया।

    ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
    ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
    गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।
    गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।

    निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
    हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।

    #shayari #audioshayari
    निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन, हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया। कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में, कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में, डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया। ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। #shayari #audioshayari
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  • Anupam Singh @anupam added blog in Shayari
    2026-04-24 04:50:47 ·
    Nigahon Ne Sajaye The Hazaron Khwab: Shayari Lyrics & Meaning
    Explore the emotional depth and meaning of the Ghazal "Nigahon ne sajaye the". A relatable analysis of unrequited love, heartbreak, loneliness, and the pain of cold words. निगाहों ने सजाए थे हजारों ख्वाब: जब इश्क़ में सिर्फ तन्हाई, इंतज़ार और सर्द बातें मिलें मोहब्बत का सबसे खूबसूरत हिस्सा क्या है? शायद वो ख्वाब, जो हम किसी और के साथ मिलकर बुनते हैं। और मोहब्बत का सबसे दर्दनाक हिस्सा क्या...
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  • Anupam Singh @anupam added audio
    2026-04-24 08:48:30 ·
    हँसी अपनी दिखाकर हम, सभी आँसू छुपा बैठे
    अँधेरों का तमाशा था, नये जुगनू छुपा बैठे

    वो आये थे सजा कर के, दिलासों के नये मंज़र
    निगाहों के असर में हम, कोई जादू छुपा बैठे

    शिकायत तो बहुत सी थीं, मगर होंठों को सी कर हम
    तड़पते दिल का इक नाज़ुक, नया पहलू छुपा बैठे

    हवाओं से गिला कैसा, चमन उजड़ा तो क्या रोना
    कि हम खुद ही गुलाबों की, सभी खुशबू छुपा बैठे

    #shayari #audioshayari #dilselyrics
    हँसी अपनी दिखाकर हम, सभी आँसू छुपा बैठे अँधेरों का तमाशा था, नये जुगनू छुपा बैठे वो आये थे सजा कर के, दिलासों के नये मंज़र निगाहों के असर में हम, कोई जादू छुपा बैठे शिकायत तो बहुत सी थीं, मगर होंठों को सी कर हम तड़पते दिल का इक नाज़ुक, नया पहलू छुपा बैठे हवाओं से गिला कैसा, चमन उजड़ा तो क्या रोना कि हम खुद ही गुलाबों की, सभी खुशबू छुपा बैठे #shayari #audioshayari #dilselyrics
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  • Anupam Singh @anupam added blog in Shayari
    2026-04-24 08:54:06 ·
    Hansi Apni Dikhakar Hum: Lyrics & Meaning Analysis
    Explore the deep emotional meaning of the Ghazal "Hansi Apni Dikhakar Hum". Dive into a profound analysis of hidden pain, fake smiles, and silent heartbreak in love. हँसी के पीछे छिपे आँसू: 'हँसी अपनी दिखाकर हम...' - दर्द, खामोशी और बेबसी की एक बेमिसाल ग़ज़ल ज़िंदगी में एक वक़्त ऐसा ज़रूर आता है जब हम अंदर से पूरी तरह टूट चुके होते हैं, लेकिन दुनिया के सामने हमारे चेहरे पर एक बड़ी सी...
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  • Anupam Singh @anupam added audio
    2026-04-24 16:57:48 ·
    दिल की हसरत की इंतहा क्या है?
    इस ख़ता की भला सज़ा क्या है?
    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

    रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है?
    पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है?
    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

    ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने,
    उन से शिकवा भी अब बजा क्या है?
    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

    #shayari #audioshayari
    दिल की हसरत की इंतहा क्या है? इस ख़ता की भला सज़ा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है? पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने, उन से शिकवा भी अब बजा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। #shayari #audioshayari
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  • Anupam Singh @anupam added blog in Shayari
    2026-04-24 16:59:14 ·
    Hum Ko Un Se Wafa Ki Hai Ummeed: Poetry Meaning & Analysis
    Explore the deep emotional meaning of the Ghazal "Hum ko unse wafa ki hai umeed, jo nahi jaante wafa kya hai". An analysis of unrequited love, blind hope, and heartbreak. हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। इश्क़ में सबसे बड़ी चोट तब नहीं लगती जब दिल टूटता है, बल्कि तब लगती है जब हमें यह एहसास होता है कि हमने अपना दिल एक ऐसे इंसान के हाथों में सौंप दिया था, जिसे उस...
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