• रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है,
    इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है।

    मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़,
    और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है।

    #shayari #audioshayari
    रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है, इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है। मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़, और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है। #shayari #audioshayari
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  • अपने हाथों ज़हर पिला कर, क्यों अनजान से बनते हो?
    सब कुछ मेरा छीन के आख़िर, क्यों हैरान से बनते हो?

    हर चेहरे पर सौ मुखौटे, दुनिया की ये फ़ितरत है
    झूठ के इस बाज़ार में तुम, क्यों इंसान से बनते हो?

    बहते रहना, मिटते जाना, क़तरे की मज़बूरी है
    एक ज़रा सी बूँद हो आख़िर, क्यों तूफ़ान से बनते हो?

    #shayari #audioshayari
    अपने हाथों ज़हर पिला कर, क्यों अनजान से बनते हो? सब कुछ मेरा छीन के आख़िर, क्यों हैरान से बनते हो? हर चेहरे पर सौ मुखौटे, दुनिया की ये फ़ितरत है झूठ के इस बाज़ार में तुम, क्यों इंसान से बनते हो? बहते रहना, मिटते जाना, क़तरे की मज़बूरी है एक ज़रा सी बूँद हो आख़िर, क्यों तूफ़ान से बनते हो? #shayari #audioshayari
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  • उसूलों पे जहाँ आँच आये, टकराना ज़रूरी है
    जो ज़िन्दा हों तो फिर, ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है

    बहुत बेबाक आँखों में ताल्लुक टिक नहीं पाता
    मुहब्बत में कशिश रखने को, शर्माना ज़रूरी है

    सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का
    जो कहता है ख़ुदा है, तो नज़र आना ज़रूरी है

    मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
    कि इसके बाद भी दुनिया में, कुछ पाना ज़रूरी है

    #shayari #audioshayari
    उसूलों पे जहाँ आँच आये, टकराना ज़रूरी है जो ज़िन्दा हों तो फिर, ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में ताल्लुक टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को, शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है, तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इसके बाद भी दुनिया में, कुछ पाना ज़रूरी है #shayari #audioshayari
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  • रूह में जो बस गया है वो फ़साना याद है
    ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर, तुझको पाना याद है

    गुफ़्तगू जब लफ़्ज़ की हद्द से गुज़र कर हो गई
    धड़कनों का धड़कनों को, गुनगुनाना याद है

    रूह में जो बस गया है वो फ़साना याद है

    #shayari #audioshayari
    रूह में जो बस गया है वो फ़साना याद है ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर, तुझको पाना याद है गुफ़्तगू जब लफ़्ज़ की हद्द से गुज़र कर हो गई धड़कनों का धड़कनों को, गुनगुनाना याद है रूह में जो बस गया है वो फ़साना याद है #shayari #audioshayari
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  • रूह में जो बस गया है, वो फ़साना याद है
    ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर, तुझको पाना याद है

    जिस्म-ओ-जाँ के फ़ासले, जिस दम मिटे थे दरमियाँ
    और मेरे वजूद में, तेरा समाना याद है

    रूह में जो बस गया है, वो फ़साना याद है

    #shayari #audioshayari
    रूह में जो बस गया है, वो फ़साना याद है ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर, तुझको पाना याद है जिस्म-ओ-जाँ के फ़ासले, जिस दम मिटे थे दरमियाँ और मेरे वजूद में, तेरा समाना याद है रूह में जो बस गया है, वो फ़साना याद है #shayari #audioshayari
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  • क्या फ़ायदा जो राह के कांटों से डर गए,
    हर ज़ख्म को होंठों पे सजाने में मज़ा है।

    तारीकियों से कह दो कि औक़ात में रहें,
    अब आँधियों में दीप जलाने में मज़ा है।

    वो इश्क़ ही क्या जिसमें कोई दर्द न मिले,
    ख़ुद को किसी की याद में मिटाने में मज़ा है।

    आसान मंज़िलों की तमन्ना किसे है अब,
    दुश्वारियों से आँख मिलाने में मज़ा है।

    मंज़िल की जुस्तजू में जो भटके हैं दर-ब-दर,
    उन रास्तों को अपना बनाने में मज़ा है।

    #shayari #audioshayari
    क्या फ़ायदा जो राह के कांटों से डर गए, हर ज़ख्म को होंठों पे सजाने में मज़ा है। तारीकियों से कह दो कि औक़ात में रहें, अब आँधियों में दीप जलाने में मज़ा है। वो इश्क़ ही क्या जिसमें कोई दर्द न मिले, ख़ुद को किसी की याद में मिटाने में मज़ा है। आसान मंज़िलों की तमन्ना किसे है अब, दुश्वारियों से आँख मिलाने में मज़ा है। मंज़िल की जुस्तजू में जो भटके हैं दर-ब-दर, उन रास्तों को अपना बनाने में मज़ा है। #shayari #audioshayari
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  • ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए
    दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया

    ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए
    दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया

    छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे
    छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे

    आपके दर को ही अपना घर कर लिया

    #shayari #audioshayari
    ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे आपके दर को ही अपना घर कर लिया #shayari #audioshayari
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  • ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है,
    पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है।

    हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे,
    अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है।

    आज मन की ये थकन भी कह रही है,
    अश्क बन कर हर उदासी बह रही है।

    एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं,
    धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है।

    हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं,
    दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं।

    आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं,
    हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।
    ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है, पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है। हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे, अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है। आज मन की ये थकन भी कह रही है, अश्क बन कर हर उदासी बह रही है। एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं, धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है। हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं, दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं। आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं, हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।
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  • धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमको
    झूठ था जो रास्तों ने था बताया हमको

    तन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पर
    रौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको

    #shayari #audioshayari
    धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमको झूठ था जो रास्तों ने था बताया हमको तन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पर रौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको #shayari #audioshayari
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  • दलीलें सब तुम्हारी हैं, अदालत भी तुम्हारी है,
    मुकद्दर की सियाही पर, हुकूमत भी तुम्हारी है!

    ग़मों को इस तरह ढँकना, लबों की मुस्कुराहट से,
    तबाही पर हँसने की, ये कैसी अदाकारी है!
    दलीलें सब तुम्हारी हैं, अदालत भी तुम्हारी है, मुकद्दर की सियाही पर, हुकूमत भी तुम्हारी है! ग़मों को इस तरह ढँकना, लबों की मुस्कुराहट से, तबाही पर हँसने की, ये कैसी अदाकारी है!
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