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कंधों पे गर्दिशों का कोई सेहरा लिए हुए,
हम चल रहे हैं आँखों में दरिया लिए हुए।
साँसों की उलझनों में भी परवाज़ की है ज़िद,
पिंजरे में हैं, मगर आसमान का नक़्शा लिए हुए।
झुलसा रही है धूप मुसलसल हयात की,
तन्हा खड़े हैं हम कोई साया लिए हुए।
हारे नहीं हैं वक़्त की इन साज़िशों से हम,
ज़िंदा हैं अपनी राख में शोला लिए हुए।
#shayari
कंधों पे गर्दिशों का कोई सेहरा लिए हुए,हम चल रहे हैं आँखों में दरिया लिए हुए।साँसों की उलझनों में भी परवाज़ की है ज़िद,पिंजरे में हैं, मगर आसमान का नक़्शा लिए हुए।झुलसा रही है धूप मुसलसल हयात की,तन्हा खड़े हैं हम कोई साया लिए हुए।हारे नहीं हैं वक़्त की इन साज़िशों से हम,ज़िंदा हैं अपनी राख में शोला लिए हुए।#shayari0 Comments ·0 Shares ·99 Views ·0 Reviews -
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ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है,
पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है।
हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे,
अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है।
आज मन की ये थकन भी कह रही है,
अश्क बन कर हर उदासी बह रही है।
एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं,
धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है।
हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं,
दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं।
आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं,
हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।
#shayari #audioshayari
ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है,पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है।हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे,अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है।आज मन की ये थकन भी कह रही है,अश्क बन कर हर उदासी बह रही है।एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं,धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है।हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं,दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं।आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं,हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।#shayari #audioshayari0 Comments ·0 Shares ·121 Views ·0 Plays ·0 Reviews -
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धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमको
झूठ था जो रास्तों ने था बताया हमको
तन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पर
रौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको
#shayari #audioshayari
धूप ने भी तल्ख़ियों से यह सिखाया हमकोझूठ था जो रास्तों ने था बताया हमकोतन्ज़ कसते हैं सितारे आज मेरी शब पररौशनी ने ख़ुद जला कर है बुझाया हमको#shayari #audioshayari0 Comments ·0 Shares ·120 Views ·1 Plays ·0 Reviews -
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दलीलें सब तुम्हारी हैं, अदालत भी तुम्हारी है,
मुकद्दर की सियाही पर, हुकूमत भी तुम्हारी है!
ग़मों को इस तरह ढँकना, लबों की मुस्कुराहट से,
तबाही पर हँसने की, ये कैसी अदाकारी है!
#shayari #audioshayari
दलीलें सब तुम्हारी हैं, अदालत भी तुम्हारी है,मुकद्दर की सियाही पर, हुकूमत भी तुम्हारी है!ग़मों को इस तरह ढँकना, लबों की मुस्कुराहट से,तबाही पर हँसने की, ये कैसी अदाकारी है!#shayari #audioshayari0 Comments ·0 Shares ·119 Views ·1 Plays ·0 Reviews -
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मेरा आईना मुंसिफ़ है, अदालत मेरी बाक़ी है,
गवाह खामोशियाँ हैं अब, मलामत मेरी बाक़ी है।
सुना कर फैसला अपना, क़लम खुद तोड़ दी मैंने,
क़फ़स का दर खुला है, पर हिरासत मेरी बाक़ी है।
#shayari
मेरा आईना मुंसिफ़ है, अदालत मेरी बाक़ी है,गवाह खामोशियाँ हैं अब, मलामत मेरी बाक़ी है।सुना कर फैसला अपना, क़लम खुद तोड़ दी मैंने,क़फ़स का दर खुला है, पर हिरासत मेरी बाक़ी है।#shayari0 Comments ·0 Shares ·140 Views ·0 Reviews