मेरा आईना मुंसिफ़ है, अदालत मेरी बाक़ी है,

गवाह खामोशियाँ हैं अब, मलामत मेरी बाक़ी है।

सुना कर फैसला अपना, क़लम खुद तोड़ दी मैंने,

क़फ़स का दर खुला है, पर हिरासत मेरी बाक़ी है।


#shayari

मेरा आईना मुंसिफ़ है, अदालत मेरी बाक़ी है,गवाह खामोशियाँ हैं अब, मलामत मेरी बाक़ी है।सुना कर फैसला अपना, क़लम खुद तोड़ दी मैंने,क़फ़स का दर खुला है, पर हिरासत मेरी बाक़ी है।#shayari
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