तुम्हें तो इल्म था, इस धूप की फितरत शिकारी है,
सजे हैं ज़ख्म जो दिल पर, तुम्हारी दस्तकारी है।


#shayari
तुम्हें तो इल्म था, इस धूप की फितरत शिकारी है, सजे हैं ज़ख्म जो दिल पर, तुम्हारी दस्तकारी है। #shayari
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