रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है,
इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है।

मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़,
और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है।

#shayari #audioshayari
रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है, इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है। मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़, और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है। #shayari #audioshayari
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