उसने भी साथ चलने का वादा नहीं किया,
हमने भी लौटने का इरादा नहीं किया।


तल्ख़ी भरी थी उसकि भी बातों में इस क़दर,
हम ने भी अपने लहजे को सादा नहीं किया।


बिछड़े हैं उस से हम तो बड़ी सोच-बूझ कर,
ये फ़ैसला भी हम ने बे-इरादा नहीं किया।


वो जा रहा था दूर, तो हम देखते रहे,
रुकने पे उस को हमने भी आमादा नहीं किया।


आँखों में आँसुओं का समंदर था उस घड़ी,
इज़हार-ए-ग़म भी हमने कुछ ज़्यादा नहीं किया।


अंदर से टूट-ते रहे हम उम्र-भर मगर,
शिकवा लबों पे हर्फ़ से ज़्यादा नहीं किया।


चुप-चाप अपनी आग में जलते रहे मगर,
रो कर किसी को हम ने भी ग़म-ज़ादा नहीं किया।


शतरंज की बिसात सी थी ज़िंदगी मगर,
खुद को किसी के हाथ का पियादा नहीं किया।


उसने भी साथ चलने का वादा नहीं किया,
हमने भी लौटने का इरादा नहीं किया।


#shayari #audioshayari #dilselyrics #ghazal
उसने भी साथ चलने का वादा नहीं किया, हमने भी लौटने का इरादा नहीं किया। तल्ख़ी भरी थी उसकि भी बातों में इस क़दर, हम ने भी अपने लहजे को सादा नहीं किया। बिछड़े हैं उस से हम तो बड़ी सोच-बूझ कर, ये फ़ैसला भी हम ने बे-इरादा नहीं किया। वो जा रहा था दूर, तो हम देखते रहे, रुकने पे उस को हमने भी आमादा नहीं किया। आँखों में आँसुओं का समंदर था उस घड़ी, इज़हार-ए-ग़म भी हमने कुछ ज़्यादा नहीं किया। अंदर से टूट-ते रहे हम उम्र-भर मगर, शिकवा लबों पे हर्फ़ से ज़्यादा नहीं किया। चुप-चाप अपनी आग में जलते रहे मगर, रो कर किसी को हम ने भी ग़म-ज़ादा नहीं किया। शतरंज की बिसात सी थी ज़िंदगी मगर, खुद को किसी के हाथ का पियादा नहीं किया। उसने भी साथ चलने का वादा नहीं किया, हमने भी लौटने का इरादा नहीं किया। #shayari #audioshayari #dilselyrics #ghazal
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