फकत इक जिस्म था मैं तो,
मेरी तुम रूह बन जाओ।
मेरे इस सूने आँगन की,
खिली तुम धूप बन जाओ।

घने काले अंधेरों में,
चिरागों सा जलूँगा मैं।
ज़माने की हर आँधी में,
तेरे आगे चलूँगा मैं।

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फकत इक जिस्म था मैं तो, मेरी तुम रूह बन जाओ। मेरे इस सूने आँगन की, खिली तुम धूप बन जाओ। घने काले अंधेरों में, चिरागों सा जलूँगा मैं। ज़माने की हर आँधी में, तेरे आगे चलूँगा मैं। #shayari #audioshayari #dilselyrics
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