• दिल की हसरत की इंतहा क्या है?
    इस ख़ता की भला सज़ा क्या है?
    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

    रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है?
    पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है?
    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

    ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने,
    उन से शिकवा भी अब बजा क्या है?
    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

    #shayari #audioshayari
    दिल की हसरत की इंतहा क्या है? इस ख़ता की भला सज़ा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है? पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने, उन से शिकवा भी अब बजा क्या है? हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है। #shayari #audioshayari
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  • हँसी अपनी दिखाकर हम, सभी आँसू छुपा बैठे
    अँधेरों का तमाशा था, नये जुगनू छुपा बैठे

    वो आये थे सजा कर के, दिलासों के नये मंज़र
    निगाहों के असर में हम, कोई जादू छुपा बैठे

    शिकायत तो बहुत सी थीं, मगर होंठों को सी कर हम
    तड़पते दिल का इक नाज़ुक, नया पहलू छुपा बैठे

    हवाओं से गिला कैसा, चमन उजड़ा तो क्या रोना
    कि हम खुद ही गुलाबों की, सभी खुशबू छुपा बैठे

    #shayari #audioshayari #dilselyrics
    हँसी अपनी दिखाकर हम, सभी आँसू छुपा बैठे अँधेरों का तमाशा था, नये जुगनू छुपा बैठे वो आये थे सजा कर के, दिलासों के नये मंज़र निगाहों के असर में हम, कोई जादू छुपा बैठे शिकायत तो बहुत सी थीं, मगर होंठों को सी कर हम तड़पते दिल का इक नाज़ुक, नया पहलू छुपा बैठे हवाओं से गिला कैसा, चमन उजड़ा तो क्या रोना कि हम खुद ही गुलाबों की, सभी खुशबू छुपा बैठे #shayari #audioshayari #dilselyrics
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  • निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
    हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।

    सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन,
    हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया।

    कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में,
    कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में,
    डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया।

    ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
    ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
    गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।
    गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।

    निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
    हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।

    #shayari #audioshayari
    निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन, हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया। कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में, कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में, डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया। ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। #shayari #audioshayari
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  • चेहरे पे मुकम्मल रज़ा की रौनक सजाए बैठे हैं,

    उसे महफूज़ रखने को, खुद पे तोहमत लगाए बैठे हैं।

    जो बिखर कर टूट गए हैं हम, तो ताज्जुब कैसा,

    कोई बाज़ी नहीं, हम अपनी ज़िंदगी गँवाए बैठे हैं।


    #shayari #audioshayari

    चेहरे पे मुकम्मल रज़ा की रौनक सजाए बैठे हैं,उसे महफूज़ रखने को, खुद पे तोहमत लगाए बैठे हैं।जो बिखर कर टूट गए हैं हम, तो ताज्जुब कैसा,कोई बाज़ी नहीं, हम अपनी ज़िंदगी गँवाए बैठे हैं।#shayari #audioshayari
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  • वजह जान लोगे, सवाल आएँगे,

    जवाबों के नए बवाल आएँगे।

    अधूरा ही रहने दो इस दास्ताँ को,

    मुकम्मल किया तो मलाल आएँगे।


    #shayari #audioshayari

    वजह जान लोगे, सवाल आएँगे, जवाबों के नए बवाल आएँगे। अधूरा ही रहने दो इस दास्ताँ को, मुकम्मल किया तो मलाल आएँगे।#shayari #audioshayari
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  • रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है,

    इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है।


    मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़,

    और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है।

    #shayari #audioshayari


    रातों की तड़प का कोई हिसाब नहीं है,इन आँखों में बचा अब कोई ख़्वाब नहीं है।मैं माँग रहा हूँ कई सदियों से मोहलत-ए-इश्क़,और उनकी खामोशी का कोई जवाब नहीं है।#shayari #audioshayari
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  • हजारों बार पूछा है मगर उत्तर नहीं आया।

    हमारे प्यार में कोई सुखद मंजर नहीं आया ।

    बहुत चाहा कि तुमसे मैं लिपटकर जान दे दूं पर।

    तुम्हारे पास आने का कोई अवसर नहीं आया।


    #shayari #audioshayari

    हजारों बार पूछा है मगर उत्तर नहीं आया।हमारे प्यार में कोई सुखद मंजर नहीं आया ।बहुत चाहा कि तुमसे मैं लिपटकर जान दे दूं पर।तुम्हारे पास आने का कोई अवसर नहीं आया।#shayari #audioshayari
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  • रूह में जो बस गया है वो फ़साना याद है

    ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर, तुझको पाना याद है


    गुफ़्तगू जब लफ़्ज़ की हद्द से गुज़र कर हो गई

    धड़कनों का धड़कनों को, गुनगुनाना याद है


    रूह में जो बस गया है वो फ़साना याद है

    #shayari #audioshayari

    रूह में जो बस गया है वो फ़साना याद हैख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर, तुझको पाना याद हैगुफ़्तगू जब लफ़्ज़ की हद्द से गुज़र कर हो गईधड़कनों का धड़कनों को, गुनगुनाना याद हैरूह में जो बस गया है वो फ़साना याद है#shayari #audioshayari
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  • रूह में जो बस गया है

    वो फ़साना याद है

    ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर

    तुझको पाना याद है


    जिस्म-ओ-जाँ के फ़ासले

    जिस दम मिटे थे दरमियाँ

    और मेरे वजूद में

    तेरा समाना याद है


    रूह में जो बस गया है

    वो फ़साना याद है

    #shayari #audioshayari

    रूह में जो बस गया हैवो फ़साना याद हैख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिरतुझको पाना याद हैजिस्म-ओ-जाँ के फ़ासलेजिस दम मिटे थे दरमियाँऔर मेरे वजूद मेंतेरा समाना याद हैरूह में जो बस गया हैवो फ़साना याद है#shayari #audioshayari
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  • रूह में जो बस गया है

    वो फ़साना याद है

    ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर

    तुझको पाना याद है


    क्या ख़बर थी कुफ़्र क्या है,

    दीन क्या, ईमान क्या

    इश्क़ की मेहराब पर

    सर को झुकाना याद है


    रूह में जो बस गया है

    वो फ़साना याद है

    ख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिर

    तुझको पाना याद है

    #shayari #audioshayari

    रूह में जो बस गया हैवो फ़साना याद हैख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिरतुझको पाना याद हैक्या ख़बर थी कुफ़्र क्या है,दीन क्या, ईमान क्याइश्क़ की मेहराब परसर को झुकाना याद हैरूह में जो बस गया हैवो फ़साना याद हैख़ुद को खोकर तेरी ख़ातिरतुझको पाना याद है#shayari #audioshayari
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  • क्या फ़ायदा जो राह के कांटों से डर गए,

    हर ज़ख्म को होंठों पे सजाने में मज़ा है।


    तारीकियों से कह दो कि औक़ात में रहें,

    अब आँधियों में दीप जलाने में मज़ा है।


    वो इश्क़ ही क्या जिसमें कोई दर्द न मिले,

    ख़ुद को किसी की याद में मिटाने में मज़ा है।


    आसान मंज़िलों की तमन्ना किसे है अब,

    दुश्वारियों से आँख मिलाने में मज़ा है।


    मंज़िल की जुस्तजू में जो भटके हैं दर-ब-दर,

    उन रास्तों को अपना बनाने में मज़ा है।

    #shayari #audioshayari

    क्या फ़ायदा जो राह के कांटों से डर गए,हर ज़ख्म को होंठों पे सजाने में मज़ा है।तारीकियों से कह दो कि औक़ात में रहें,अब आँधियों में दीप जलाने में मज़ा है।वो इश्क़ ही क्या जिसमें कोई दर्द न मिले,ख़ुद को किसी की याद में मिटाने में मज़ा है।आसान मंज़िलों की तमन्ना किसे है अब,दुश्वारियों से आँख मिलाने में मज़ा है।मंज़िल की जुस्तजू में जो भटके हैं दर-ब-दर,उन रास्तों को अपना बनाने में मज़ा है।#shayari #audioshayari
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  • ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए

    दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया


    ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिए

    दिल को वीरान-सा इक शहर कर लिया


    छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे

    छूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगे


    आपके दर को ही अपना घर कर लिया


    #shayari #audioshayari

    ख़्वाब जितने भी थे राख होने दिएदिल को वीरान-सा इक शहर कर लियाख़्वाब जितने भी थे राख होने दिएदिल को वीरान-सा इक शहर कर लियाछूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगेछूट कर आप से, हम कहाँ जाएँगेआपके दर को ही अपना घर कर लिया#shayari #audioshayari
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