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शुक्र है उस रब का जिसने, रास्ता ये दे दिया
तुमसे मिलने का ठिकाना, ख़्वाब में ही दे दिया
वरना मर जाते तड़प कर, हम तुम्हारी याद में
जीने का हमको बहाना, ख़्वाब में ही दे दिया
दिन गुज़रता है अकेले, भीड़ के इस शहर में
पर तुम्हारा साथ प्यारा, ख़्वाब में ही दे दिया
आँख खुलते ही हक़ीक़त, छीन लेती है तुम्हें
जो यहाँ पूरा न हो पाया, ख़्वाब में ही दे दिया
फासले मिटते नहीं थे, लाख कोशिश के बाद
वो सुहाना एक ज़माना, ख़्वाब में ही दे दिया
ख़ुश-नसीबी है हमारी, नींद आती है हमें
प्यार का सारा खज़ाना, ख़्वाब में ही दे दिया
#shayari #audioshayari
शुक्र है उस रब का जिसने, रास्ता ये दे दियातुमसे मिलने का ठिकाना, ख़्वाब में ही दे दियावरना मर जाते तड़प कर, हम तुम्हारी याद मेंजीने का हमको बहाना, ख़्वाब में ही दे दियादिन गुज़रता है अकेले, भीड़ के इस शहर मेंपर तुम्हारा साथ प्यारा, ख़्वाब में ही दे दियाआँख खुलते ही हक़ीक़त, छीन लेती है तुम्हेंजो यहाँ पूरा न हो पाया, ख़्वाब में ही दे दियाफासले मिटते नहीं थे, लाख कोशिश के बादवो सुहाना एक ज़माना, ख़्वाब में ही दे दियाख़ुश-नसीबी है हमारी, नींद आती है हमेंप्यार का सारा खज़ाना, ख़्वाब में ही दे दिया#shayari #audioshayari0 Comments ·0 Shares ·24 Views ·1 Plays ·0 Reviews -
नींद उड़ने लगी, ख़्वाब छाने लगे,
हम ख्यालों की महफ़िल सजाने लगे।
रात की ओट में चाँद छुप सा गया,
रात की ओट में चाँद छुप सा गया,
रूह के आइने जगमगाने लगे।
रूह के आइने जगमगाने लगे।
#shayari #audioshayariनींद उड़ने लगी, ख़्वाब छाने लगे, हम ख्यालों की महफ़िल सजाने लगे। रात की ओट में चाँद छुप सा गया, रात की ओट में चाँद छुप सा गया, रूह के आइने जगमगाने लगे। रूह के आइने जगमगाने लगे। #shayari #audioshayari0 Comments ·0 Shares ·58 Views ·2 Plays ·0 Reviews -
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी बेरुखी जो रुलाए तो,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
वो जो रात-दिन की थी आशिक़ी,
वो जो बे-वजह की थी दिल्लगी,
मेरा हाथ छोड़ना राह में,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरा ज़िक्र महफ़िल में आए तो,
मेरा हाल कोई बताए तो,
मेरी याद को वहीं रोक कर,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
नए रास्तों पे निकल पड़े,
नए अजनबी से जो मिल पड़े,
कटे जो सफ़र किसी और संग,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।मेरी खामोशी जो चुभे कभी, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। मेरी बेरुखी जो रुलाए तो, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। वो जो रात-दिन की थी आशिक़ी, वो जो बे-वजह की थी दिल्लगी, मेरा हाथ छोड़ना राह में, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। मेरा ज़िक्र महफ़िल में आए तो, मेरा हाल कोई बताए तो, मेरी याद को वहीं रोक कर, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। नए रास्तों पे निकल पड़े, नए अजनबी से जो मिल पड़े, कटे जो सफ़र किसी और संग, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम। मेरी खामोशी जो चुभे कभी, मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।0 Comments ·0 Shares ·161 Views ·0 Reviews -
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