हँसी अपनी दिखाकर हम,
सभी आँसू छुपा बैठे
अँधेरों का तमाशा था,
नये जुगनू छुपा बैठे
वो आये थे सजा कर के,
दिलासों के नये मंज़र
निगाहों के असर में हम,
कोई जादू छुपा बैठे
शिकायत तो बहुत सी थीं,
मगर होंठों को सी कर हम
तड़पते दिल का इक नाज़ुक,
नया पहलू छुपा बैठे
हवाओं से गिला कैसा,
चमन उजड़ा तो क्या रोना
कि हम खुद ही गुलाबों की,
सभी खुशबू छुपा बैठे
#shayari #audioshayari
सभी आँसू छुपा बैठे
अँधेरों का तमाशा था,
नये जुगनू छुपा बैठे
वो आये थे सजा कर के,
दिलासों के नये मंज़र
निगाहों के असर में हम,
कोई जादू छुपा बैठे
शिकायत तो बहुत सी थीं,
मगर होंठों को सी कर हम
तड़पते दिल का इक नाज़ुक,
नया पहलू छुपा बैठे
हवाओं से गिला कैसा,
चमन उजड़ा तो क्या रोना
कि हम खुद ही गुलाबों की,
सभी खुशबू छुपा बैठे
#shayari #audioshayari
हँसी अपनी दिखाकर हम,
सभी आँसू छुपा बैठे
अँधेरों का तमाशा था,
नये जुगनू छुपा बैठे
वो आये थे सजा कर के,
दिलासों के नये मंज़र
निगाहों के असर में हम,
कोई जादू छुपा बैठे
शिकायत तो बहुत सी थीं,
मगर होंठों को सी कर हम
तड़पते दिल का इक नाज़ुक,
नया पहलू छुपा बैठे
हवाओं से गिला कैसा,
चमन उजड़ा तो क्या रोना
कि हम खुद ही गुलाबों की,
सभी खुशबू छुपा बैठे
#shayari #audioshayari