तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
यूँ ही नज़रों से नज़रें मिलाते रहो,
दर्द सीने का चुप-चाप ढल जाएगा।
तेरी साँसों की गरमी जो आती रहे,
बर्फ़ सा सर्द दिल भी पिघल जाएगा।
हाथ हाथों में लेकर जो बैठे रहो,
गिरता-पड़ता मुक़द्दर सँभल जाएगा।
अपनी ज़ुल्फ़ों का साया किए रखना तुम,
धूप का ये सफ़र भी बदल जाएगा।
तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
#shayari #audioshayari
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
यूँ ही नज़रों से नज़रें मिलाते रहो,
दर्द सीने का चुप-चाप ढल जाएगा।
तेरी साँसों की गरमी जो आती रहे,
बर्फ़ सा सर्द दिल भी पिघल जाएगा।
हाथ हाथों में लेकर जो बैठे रहो,
गिरता-पड़ता मुक़द्दर सँभल जाएगा।
अपनी ज़ुल्फ़ों का साया किए रखना तुम,
धूप का ये सफ़र भी बदल जाएगा।
तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
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तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
यूँ ही नज़रों से नज़रें मिलाते रहो,
दर्द सीने का चुप-चाप ढल जाएगा।
तेरी साँसों की गरमी जो आती रहे,
बर्फ़ सा सर्द दिल भी पिघल जाएगा।
हाथ हाथों में लेकर जो बैठे रहो,
गिरता-पड़ता मुक़द्दर सँभल जाएगा।
अपनी ज़ुल्फ़ों का साया किए रखना तुम,
धूप का ये सफ़र भी बदल जाएगा।
तुम तसल्ली न दो, सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा।
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