अँधेरों से शिकायत का कोई हासिल नहीं होता,
हवा के रुख़ पे इक दीपक जलाना भी ज़रूरी है।
गले मिल कर गिले-शिकवे भुला देना रिवायत है,
मुहब्बत में ज़रा सा हक़ जताना भी ज़रूरी है।
फ़क़त वादे मुकम्मल ज़िंदगी को कर नहीं सकते,
जो थामा है किसी का हाथ, निभाना भी ज़रूरी है।
बहुत औरों के क़िस्सों को सुना है दिल लगा कर के,
कभी अपना कोई क़िस्सा सुनाना भी ज़रूरी है।
#shayari #audioshayari
हवा के रुख़ पे इक दीपक जलाना भी ज़रूरी है।
गले मिल कर गिले-शिकवे भुला देना रिवायत है,
मुहब्बत में ज़रा सा हक़ जताना भी ज़रूरी है।
फ़क़त वादे मुकम्मल ज़िंदगी को कर नहीं सकते,
जो थामा है किसी का हाथ, निभाना भी ज़रूरी है।
बहुत औरों के क़िस्सों को सुना है दिल लगा कर के,
कभी अपना कोई क़िस्सा सुनाना भी ज़रूरी है।
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अँधेरों से शिकायत का कोई हासिल नहीं होता,
हवा के रुख़ पे इक दीपक जलाना भी ज़रूरी है।
गले मिल कर गिले-शिकवे भुला देना रिवायत है,
मुहब्बत में ज़रा सा हक़ जताना भी ज़रूरी है।
फ़क़त वादे मुकम्मल ज़िंदगी को कर नहीं सकते,
जो थामा है किसी का हाथ, निभाना भी ज़रूरी है।
बहुत औरों के क़िस्सों को सुना है दिल लगा कर के,
कभी अपना कोई क़िस्सा सुनाना भी ज़रूरी है।
#shayari #audioshayari