दिल की हसरत की इंतहा क्या है?
इस ख़ता की भला सज़ा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है?
पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने,
उन से शिकवा भी अब बजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
#shayari #audioshayari
इस ख़ता की भला सज़ा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है?
पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने,
उन से शिकवा भी अब बजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
#shayari #audioshayari
दिल की हसरत की इंतहा क्या है?
इस ख़ता की भला सज़ा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
रेग-ए-सहरा में मोजज़ा क्या है?
पत्थरों से ये इल्तिजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
ख़ुद को धोखे में रख लिया हम ने,
उन से शिकवा भी अब बजा क्या है?
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।
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