निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।

सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन,
हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया।

कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में,
कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में,
डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया।

ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने,
गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।
गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया।

निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के,
हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया।

#shayari #audioshayari
निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। सफर में हम अकेले थे, मुसाफिर की तरह लेकिन, हमें मंज़िल बताने को, कोई रहबर नहीं आया। कहा था डूब जाने दो तुम्हारी झील सी आँखों में, कहा था डूब जाने दो, तुम्हारी झील सी आँखों में, डुबो देजो मुझे इसमें, कोई भंवर नहीं आया। ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, ज़हर मीठा पिलाया है, तुम्हारी सर्द बातों ने, गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। गला मेरा काटने को, कोई खंजर नहीं आया। निगाहों ने सजाए थे, हजारों ख्वाब मिलने के, हमें सीने लगाने को, कोई दिलबर नहीं आया। #shayari #audioshayari
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