अनकही सी अगन इन निगाहों में है,
इक सुहानी थकन आज बाहों में है।
लफ़्ज़ होठों पे आकर पिघलने लगे,
लफ़्ज़ होठों पे आकर पिघलने लगे,
ज़िन्दगी का सुकूँ इन पनाहों में है।
ज़िन्दगी का सुकूँ इन पनाहों में है।
#shayari #audioshayari
इक सुहानी थकन आज बाहों में है।
लफ़्ज़ होठों पे आकर पिघलने लगे,
लफ़्ज़ होठों पे आकर पिघलने लगे,
ज़िन्दगी का सुकूँ इन पनाहों में है।
ज़िन्दगी का सुकूँ इन पनाहों में है।
#shayari #audioshayari
अनकही सी अगन इन निगाहों में है,
इक सुहानी थकन आज बाहों में है।
लफ़्ज़ होठों पे आकर पिघलने लगे,
लफ़्ज़ होठों पे आकर पिघलने लगे,
ज़िन्दगी का सुकूँ इन पनाहों में है।
ज़िन्दगी का सुकूँ इन पनाहों में है।
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