आँखें खुली हैं पर.. ख़्वाब कौन देखेगा,
पन्नों पे इस सफ़र का.. हिसाब कौन देखेगा।


सब निकल पड़े हैं सुबह से बस काम की तरफ़,
रास्ते में खिले हुए वो.. गुलाब कौन देखेगा।


#shayari #audioshayari
आँखें खुली हैं पर.. ख़्वाब कौन देखेगा, पन्नों पे इस सफ़र का.. हिसाब कौन देखेगा। सब निकल पड़े हैं सुबह से बस काम की तरफ़, रास्ते में खिले हुए वो.. गुलाब कौन देखेगा। #shayari #audioshayari
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