राज़-ए-दिल अब उन्हें... तो जताना है पर,
लफ़्ज़ होंठों पे आ... लड़खड़ा जाते हैं।

अक्स मेरा भी क्या... उनकी आँखों में है?
टूट जाने के डर से... सहम जाते हैं।

तय नहीं मंज़िलें... इस मोहब्बत की तो,
हम क़दम-दर-क़दम डगमगा... जाते हैं।

एक तरफ़ा है शायद ये एहसास ही...
खुद को झूठी तसल्ली दिला जाते हैं।
खुद को झूठी तसल्ली दिला जाते हैं।

#shayari #audioshayari #dilselyrics
राज़-ए-दिल अब उन्हें... तो जताना है पर, लफ़्ज़ होंठों पे आ... लड़खड़ा जाते हैं। अक्स मेरा भी क्या... उनकी आँखों में है? टूट जाने के डर से... सहम जाते हैं। तय नहीं मंज़िलें... इस मोहब्बत की तो, हम क़दम-दर-क़दम डगमगा... जाते हैं। एक तरफ़ा है शायद ये एहसास ही... खुद को झूठी तसल्ली दिला जाते हैं। खुद को झूठी तसल्ली दिला जाते हैं। #shayari #audioshayari #dilselyrics
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