ख़ुद में ही उलझा, अनजान हूँ मैं।
दुनिया की ख़ातिर, आसान हूँ मैं।
आँसू छुपाकर, आँखें सुखा लीं,
ज़िंदा हूँ लेकिन, बेजान हूँ मैं।
दरवाज़े दिल के, ख़ुद ही गिराए,
अंदर से बिल्कुल, सुनसान हूँ मैं।
मंज़िल भुला कर, बस चल पड़ा था,
अब तो सफ़र की, थकान हूँ मैं।
सच को दबा कर, हँसने लगा जो,
अपनी अदा पे, हैरान हूँ मैं।
#shayari #audioshayari #dilselyrics
दुनिया की ख़ातिर, आसान हूँ मैं।
आँसू छुपाकर, आँखें सुखा लीं,
ज़िंदा हूँ लेकिन, बेजान हूँ मैं।
दरवाज़े दिल के, ख़ुद ही गिराए,
अंदर से बिल्कुल, सुनसान हूँ मैं।
मंज़िल भुला कर, बस चल पड़ा था,
अब तो सफ़र की, थकान हूँ मैं।
सच को दबा कर, हँसने लगा जो,
अपनी अदा पे, हैरान हूँ मैं।
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ख़ुद में ही उलझा, अनजान हूँ मैं।
दुनिया की ख़ातिर, आसान हूँ मैं।
आँसू छुपाकर, आँखें सुखा लीं,
ज़िंदा हूँ लेकिन, बेजान हूँ मैं।
दरवाज़े दिल के, ख़ुद ही गिराए,
अंदर से बिल्कुल, सुनसान हूँ मैं।
मंज़िल भुला कर, बस चल पड़ा था,
अब तो सफ़र की, थकान हूँ मैं।
सच को दबा कर, हँसने लगा जो,
अपनी अदा पे, हैरान हूँ मैं।
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