दर्द की धूप में जो जलाया मुझे,
छाँव का फिर भरम क्यूं दिखाया मुझे?
रूह प्यासी रही, अश्क बहते रहे,
हम अकेले ही ये ज़ुल्म सहते रहे।
आँसुओं को जो पलकों पे रोका गया,
झूठ के फ़रेबों में झोंका गया।
मैं तो साहिल पे कश्ती बचाती रही,
मुझको लहरों के हाथों डुबोया गया।
इश्क़ जब-जब ज़माने में माँगा गया,
बेगुनाही को सूली पे टांगा गया।
कातिलों को यहाँ सब ने सजदे किए,
दिल से जिसने भी चाहा वो मारा गया।
साँस टूटेगी जिस दिन बिखर जाएंगे,
तेरी यादों से हम अब लिपट जाएंगे।
दर्द की इस हद से अब गुज़र जाएंगे,
हम अंधेरों के सीने उतर जाएंगे।
...हम अंधेरों के सीने उतर जाएंगे।
#shayari #audioshayari #ishqtohlaalhai
छाँव का फिर भरम क्यूं दिखाया मुझे?
रूह प्यासी रही, अश्क बहते रहे,
हम अकेले ही ये ज़ुल्म सहते रहे।
आँसुओं को जो पलकों पे रोका गया,
झूठ के फ़रेबों में झोंका गया।
मैं तो साहिल पे कश्ती बचाती रही,
मुझको लहरों के हाथों डुबोया गया।
इश्क़ जब-जब ज़माने में माँगा गया,
बेगुनाही को सूली पे टांगा गया।
कातिलों को यहाँ सब ने सजदे किए,
दिल से जिसने भी चाहा वो मारा गया।
साँस टूटेगी जिस दिन बिखर जाएंगे,
तेरी यादों से हम अब लिपट जाएंगे।
दर्द की इस हद से अब गुज़र जाएंगे,
हम अंधेरों के सीने उतर जाएंगे।
...हम अंधेरों के सीने उतर जाएंगे।
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दर्द की धूप में जो जलाया मुझे,
छाँव का फिर भरम क्यूं दिखाया मुझे?
रूह प्यासी रही, अश्क बहते रहे,
हम अकेले ही ये ज़ुल्म सहते रहे।
आँसुओं को जो पलकों पे रोका गया,
झूठ के फ़रेबों में झोंका गया।
मैं तो साहिल पे कश्ती बचाती रही,
मुझको लहरों के हाथों डुबोया गया।
इश्क़ जब-जब ज़माने में माँगा गया,
बेगुनाही को सूली पे टांगा गया।
कातिलों को यहाँ सब ने सजदे किए,
दिल से जिसने भी चाहा वो मारा गया।
साँस टूटेगी जिस दिन बिखर जाएंगे,
तेरी यादों से हम अब लिपट जाएंगे।
दर्द की इस हद से अब गुज़र जाएंगे,
हम अंधेरों के सीने उतर जाएंगे।
...हम अंधेरों के सीने उतर जाएंगे।
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