चुप खड़ा हूँ... लब सिले हैं
अश्क भी... ठहर न जाए
काँच सा... ये दिल अकेला
टूट कर... बिखर न जाए!
साथ चलने की क़सम तुम, खा रहे हो आज लेकिन
देखना ये कल तुम्हारा, दिल कहीं मुकर न जाए!
काँच सा ये दिल अकेला, टूट कर बिखर न जाए...
अश्क अपने जाम में मैं...आज तो मिला रहा हूँ!
अश्क अपने जाम में मैं, आज तो मिला रहा हूँ
पी रहा हूँ मैं इसे भी... हो कहीं ज़हर न जाए!
चुप खड़ा हूँ... लब सिले हैं...
अश्क भी ठहर न जाए...
#shayari #audioshayari
अश्क भी... ठहर न जाए
काँच सा... ये दिल अकेला
टूट कर... बिखर न जाए!
साथ चलने की क़सम तुम, खा रहे हो आज लेकिन
देखना ये कल तुम्हारा, दिल कहीं मुकर न जाए!
काँच सा ये दिल अकेला, टूट कर बिखर न जाए...
अश्क अपने जाम में मैं...आज तो मिला रहा हूँ!
अश्क अपने जाम में मैं, आज तो मिला रहा हूँ
पी रहा हूँ मैं इसे भी... हो कहीं ज़हर न जाए!
चुप खड़ा हूँ... लब सिले हैं...
अश्क भी ठहर न जाए...
#shayari #audioshayari
चुप खड़ा हूँ... लब सिले हैं
अश्क भी... ठहर न जाए
काँच सा... ये दिल अकेला
टूट कर... बिखर न जाए!
साथ चलने की क़सम तुम, खा रहे हो आज लेकिन
देखना ये कल तुम्हारा, दिल कहीं मुकर न जाए!
काँच सा ये दिल अकेला, टूट कर बिखर न जाए...
अश्क अपने जाम में मैं...आज तो मिला रहा हूँ!
अश्क अपने जाम में मैं, आज तो मिला रहा हूँ
पी रहा हूँ मैं इसे भी... हो कहीं ज़हर न जाए!
चुप खड़ा हूँ... लब सिले हैं...
अश्क भी ठहर न जाए...
#shayari #audioshayari