क्या फ़ायदा जो राह के कांटों से डर गए,
हर ज़ख्म को होंठों पे सजाने में मज़ा है।
तारीकियों से कह दो कि औक़ात में रहें,
अब आँधियों में दीप जलाने में मज़ा है।
वो इश्क़ ही क्या जिसमें कोई दर्द न मिले,
ख़ुद को किसी की याद में मिटाने में मज़ा है।
आसान मंज़िलों की तमन्ना किसे है अब,
दुश्वारियों से आँख मिलाने में मज़ा है।
मंज़िल की जुस्तजू में जो भटके हैं दर-ब-दर,
उन रास्तों को अपना बनाने में मज़ा है।
#shayari #audioshayari
हर ज़ख्म को होंठों पे सजाने में मज़ा है।
तारीकियों से कह दो कि औक़ात में रहें,
अब आँधियों में दीप जलाने में मज़ा है।
वो इश्क़ ही क्या जिसमें कोई दर्द न मिले,
ख़ुद को किसी की याद में मिटाने में मज़ा है।
आसान मंज़िलों की तमन्ना किसे है अब,
दुश्वारियों से आँख मिलाने में मज़ा है।
मंज़िल की जुस्तजू में जो भटके हैं दर-ब-दर,
उन रास्तों को अपना बनाने में मज़ा है।
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क्या फ़ायदा जो राह के कांटों से डर गए,
हर ज़ख्म को होंठों पे सजाने में मज़ा है।
तारीकियों से कह दो कि औक़ात में रहें,
अब आँधियों में दीप जलाने में मज़ा है।
वो इश्क़ ही क्या जिसमें कोई दर्द न मिले,
ख़ुद को किसी की याद में मिटाने में मज़ा है।
आसान मंज़िलों की तमन्ना किसे है अब,
दुश्वारियों से आँख मिलाने में मज़ा है।
मंज़िल की जुस्तजू में जो भटके हैं दर-ब-दर,
उन रास्तों को अपना बनाने में मज़ा है।
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