शजर खुद ही जला कर, छाँव की उम्मीद जारी है,
अजब ये खुद-फ़रेबी है, अजब ये पर्दा-दारी है!
हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करना खुद चुना तुमने,
फैसला भी तुम्हारा था, तकलीफ़ भी तुम्हारी है।
#shayari
अजब ये खुद-फ़रेबी है, अजब ये पर्दा-दारी है!
हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करना खुद चुना तुमने,
फैसला भी तुम्हारा था, तकलीफ़ भी तुम्हारी है।
#shayari
शजर खुद ही जला कर, छाँव की उम्मीद जारी है,
अजब ये खुद-फ़रेबी है, अजब ये पर्दा-दारी है!
हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करना खुद चुना तुमने,
फैसला भी तुम्हारा था, तकलीफ़ भी तुम्हारी है।
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