कुछ तो तिरे मौसम ही मुझे रास कम आए,
और कुछ मिरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी।


हर बार मैं झुक जाता ये मुमकिन ही नहीं था,
मुझमें मिरे किरदार की ग़ैरत भी बहुत थी।


#shayari #audioshayari
कुछ तो तिरे मौसम ही मुझे रास कम आए, और कुछ मिरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी। हर बार मैं झुक जाता ये मुमकिन ही नहीं था, मुझमें मिरे किरदार की ग़ैरत भी बहुत थी। #shayari #audioshayari
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