मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी बेरुखी जो रुलाए तो,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
वो जो रात-दिन की थी आशिक़ी,
वो जो बे-वजह की थी दिल्लगी,
मेरा हाथ छोड़ना राह में,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरा ज़िक्र महफ़िल में आए तो,
मेरा हाल कोई बताए तो,
मेरी याद को वहीं रोक कर,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
नए रास्तों पे निकल पड़े,
नए अजनबी से जो मिल पड़े,
कटे जो सफ़र किसी और संग,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी बेरुखी जो रुलाए तो,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
वो जो रात-दिन की थी आशिक़ी,
वो जो बे-वजह की थी दिल्लगी,
मेरा हाथ छोड़ना राह में,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरा ज़िक्र महफ़िल में आए तो,
मेरा हाल कोई बताए तो,
मेरी याद को वहीं रोक कर,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
नए रास्तों पे निकल पड़े,
नए अजनबी से जो मिल पड़े,
कटे जो सफ़र किसी और संग,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी बेरुखी जो रुलाए तो,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
वो जो रात-दिन की थी आशिक़ी,
वो जो बे-वजह की थी दिल्लगी,
मेरा हाथ छोड़ना राह में,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरा ज़िक्र महफ़िल में आए तो,
मेरा हाल कोई बताए तो,
मेरी याद को वहीं रोक कर,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
नए रास्तों पे निकल पड़े,
नए अजनबी से जो मिल पड़े,
कटे जो सफ़र किसी और संग,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
मेरी खामोशी जो चुभे कभी,
मुझे बेवफ़ा ही समझना तुम।
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