ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है,
पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है।

हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे,
अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है।

आज मन की ये थकन भी कह रही है,
अश्क बन कर हर उदासी बह रही है।

एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं,
धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है।

हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं,
दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं।

आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं,
हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।
ज़िंदगी का रास्ता तो कट रहा है, पर सफ़र में हौसला क्यों घट रहा है। हम चले थे ख़्वाब दिल में ले के सारे, अब नज़र से हर नज़ारा हट रहा है। आज मन की ये थकन भी कह रही है, अश्क बन कर हर उदासी बह रही है। एक टुकड़ा छाँव का हम ढूँढते हैं, धूप में ही ज़िंदगी अब रह रही है। हम हक़ीक़त ज़िंदगी की जानते हैं, दर्द को अपना मुक़द्दर मानते हैं। आज ख़ुद से एक वादा कर रहे हैं, हर ख़ुशी को दर्द में पहचानते हैं।
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